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गरीब परिवार की मदद कर श्रेया हॉस्पिटल के डॉक्टर व मैनेजमेंट ने पेश की मिसाल GHAZIABAD

संजय गिरि / गाज़ियाबाद voice

साहिबाबाद में रहने वाले परिवार में खुशियाँ आने को हुई तो आर्थिक तंगी इसके आड़े आ गई. हालात ऐसे कि परिवार के मुखिया ने रुपये न होने की स्थिति में अस्पताल में जन्मे अपने अस्वस्थ बच्चे को घर लाने तक से इनकार कर दिया. ऐसे में साहिबाबाद स्थित शालीमार गार्डन स्थित श्रेया हॉस्पिटल ने आगे बढ़कर इस परिवार की मदद की और डॉक्टरों की मदद व बेहतर देखभाल से बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो कर अपने परिवार के बीच पहुँच गया.

इलाज के आड़े आई परिवार की आर्थिक तंगी

मूल रूप से झारखंड के गोडा निवासी व बेलदारी का काम करने वाला युवक साहिबाबाद के गणेशपुरी में रहता है व बेलदारी कर परिवार का गुजर बसर करता है. लॉक डाउन के दौरान काम न मिलने की वजह से परिवार की आर्थिक हालत बिगड़ गयी. इस दौरान उसकी पत्नी गर्भावस्था से गुजर रही थीं. 12 अगस्त को महिला की तबियत बिगड़ी तो परिवार के लोग उसे लेकर शालीमार गार्डन स्थित श्रेया हॉस्पिटल पहुंचे. हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने उसकी हालत को देखते ही तत्काल डिलीवरी कराये जाने की बात कही. लेकिन परिवार ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए कहा कि उनके पास डिलीवरी या इलाज कराये जाने के लिए रुपये नहीं हैं.

बिना देर किये डॉक्टरों ने इलाज किया शुरू

आधी रात को महिला की बिगड़ती जा रही तबियत को देखते हुए हॉस्पिटल के मैनेजमेंट व डॉक्टरों ने रुपये की व्यवस्था न होने के बाद भी बिना देर किये महिला का उपचार शुरू कर दिया और महिला ने बच्चे को जन्म दिया. श्रेया हॉस्पिटल की डॉ शिखा मलिक ने बताया कि अस्पताल में आते ही महिला के डिलीवरी हुई इसलिए नवजात बच्चे कि स्थिति ठीक नहीं थी. इसके चलते बच्चे की जांच करने के बाद उसे वेंटीलेटर पर रखना पड़ा.

लाचार पिता ने कहा- हॉस्पिटल अपने पास रख ले बच्चे को

48 घंटे बच्चे को वेंटीलेटर पर रखने के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ लेकिन हॉस्पिटल में उसकी लगातार देखरेख/विभिन्न जांच व उपचार बेहद ज़रूरी था और इसमें रुपये भी खर्च होने थे. लेकिन बच्चे के पिता ने इस से पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि उसके पास बच्चे के इलाज के लिए रुपये नहीं. यह कहते हुए घर लौट गया कि अस्पताल बच्चे को अपने पास रख ले. पिता के इस रवैये को देख बच्चे की मां भी आहत थी कि रुपये की कमी के चलते भला अपने जिगर के टुकड़े को कैसे खुद से अलग कर दे.

परिवार ने जताया हॉस्पिटल मैनेजमेंट व डॉक्टरों का आभार

ऐसे में श्रेया हॉस्पिटल कि डॉक्टरों व मैनेजमेंट ने परिवार कि इस परेशानी को समझा व नवजात बच्चे व उसकी माँ का इलाज जारी रखा. श्रेया हॉस्पिटल के मैनेजर एस पी तिवारी व हिमांशु खत्नानी ने हॉस्पिटल संचालक डॉ डी पी मिश्रा से बात कर निःशुल्क महिला व बच्चे के इलाज का फैसला लिया. कुछ दिनों तक डॉक्टरों की देखरेख व उपचार व दोनों के स्वस्थ होने के बाद महिला व बच्चे को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया. यही नहीं, हॉस्पिटल कि तरफ से बच्चे के उपयोग में आने वाली बेबी केयर किट भी दी गयी. हॉस्पिटल से जाते वक़्त महिला ने हॉस्पिटल के डॉ डी पी मिश्र, डॉ शिखा मलिक, एस पी तिवारी, हिमांशु खत्नानी व अन्य स्टाफ का शुक्रिया अदा किया.

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