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वेस्ट यूपी में पहली बार शॉकवेव कोरोनरी लीथोट्रिप्सी के जरिये हुआ सफल उपचार GHAZIABAD

संजय गिरि / गाज़ियाबाद voice

गाज़ियाबाद के वैशाली स्थित मैक्स हॉस्पिटल में कोरोनरी लीथोट्रिप्सी तकनीक का उपयोग कर मरीज का सफलतापूर्वक इलाज किया गया. 69 वर्षीय मरीज के दिल में कैल्शियम जमा होने के कारण उसकी जान का खतरा था. जिसके बाद मैक्स हॉस्पिटल में इस तकनीक से मरीज का सफलतापूर्वक उपचार किया गया. हॉस्पिटल मैनेजमेंट का दावा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी दिल्ली में पहली बार इस पद्धति से किसी मरीज का उपचार किया गया है.

मैक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों के मुताबिक़ मरीज के सीने में बार-बार गंभीर दर्द की शिकायत हो रही थी. उसे गंभीर हालत में इमरजेंसी में भर्ती कर पूरी जांच के बाद उसके दिल की मुख्य धमनी में 90% ब्लॉकेज पाया गया. इस ब्लॉकेज का कारण कैल्शियम की मोटी परत थी, जिसके कारण एंजियोप्लास्टी करना बिल्कुल भी संभव नहीं था. पूरी प्रक्रिया लोकल एनीस्थीसिया के तहत धमनी में मौजूद ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) (एक छोटे कैमरे की मदद से) की मदद से की गई. मरीज को प्रक्रिया के 2 दिनों बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है.

मैक्स हॉस्पिटल  वैशाली में कार्डियोलॉजी के एसोसिएट निदेशक डॉ अमित मलिक ने जानकारी देते हुए कहा कि चूंकि, कैल्शियम ब्लॉकेज इलाज के समय और चुनौतियों को बढ़ा देता है इसलिए ऐसे मामलों के लिए इंट्रावस्कुलर लीथोट्रिप्सी एक बेहतर विकल्प है. कैल्शियम बहुत ज्यादा मात्रा में जमा होने के कारण एडवांस कोरोनरी आर्टरी डीजीज़ (सीएडी) से ग्रस्त मरीजों के इलाज के लिए यह एक नई और एडवांस प्रक्रिया है. हमें बेहद खुशी है कि इस क्षेत्र में इस प्रक्रिया की पहल हमने की. यह प्रक्रिया भारत में कई ऐसे रोगियों के लिए फायदेमंद साबित होगी जो एंजियोप्लास्टी से गुज़र रहे हैं. यह एक अग्रणी थेरेपी है जो दुनिया भर में कोरोनरी आर्टरी के मरीजों की मदद कर रही है और इससे भी अच्छी बात यह है कि अब यह भारत में भी उपलब्ध है.

डॉ अमित मलिक ने बताया कि यह एक हाई एंड तकनीक है जिसमें रोटा-एब्लेशन नाम की एक हाई स्पीड डायमंड ड्रिल की मदद से रास्ता तैयार किया जाता है. एक बार जब रास्ता तैयार हो जाता है तो धमनी में एक खास गुब्बारा लगाया जाता है जो सोनिक प्रेशर वेव्स निकालकर जमा कैल्शियम को तोड़ देता है. इसके बाद दिल में एक स्टंट लगाया जाता है.

डॉ मलिक ने जानकारी देते हुए कहा कि एक मामूली कट के साथ यह तकनीक उन सभी मरीजों के लिए एक नई उम्मीद की तरह है जिनकी धमनी को बैलून एंजियोप्लास्टी की मदद से खोलना संभव नहीं होता है. अब सख्त से सख्त ब्लॉकेज को न सिर्फ खोलना संभव है बल्कि लंबी अवधि में इसके परिणाम भी बेहतर होते हैं. इंट्रावस्कुलर लीथोट्रिप्सी के दौरान उत्पन्न होने वाली सोनिक प्रेशर वेव्स प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और सिद्ध उपचार बनाती हैं जो कैल्शियम की परत को आसानी से तोड़ने में मदद करती है.

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