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कैंसर से निपटने की व्यावहारिक रणनीति विकसित करने की ज़रूरत : डॉ अभिषेक यादव GHAZIABAD

विनोद गिरि / गाज़ियाबाद voice

विश्व कैंसर दिवस के मौके पर कौशांबी स्थित यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस मौके पर हॉस्पिटल के वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर अभिषेक यादव ने बताया कि वर्तमान में दुनिया भर में हर साल 76 लाख लोग कैंसर से दम तोड़ते हैं जिनमें से 40 लाख लोग समय से पहले (30-69 वर्ष आयु वर्ग) के मर जाते हैं, इसलिए समय की मांग है कि इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ कैंसर से निपटने की व्यावहारिक रणनीति विकसित करना है.

उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 तक कैंसर के कारण समय से पहले होने वाली मौतों के बढ़कर प्रति वर्ष 60 लाख होने का अनुमान है. यदि विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2025 तक कैंसर के कारण समय से पहले होने वाली मौतों में 25 प्रतिशत कमी के लक्ष्य को हासिल किया जाए तो हर साल 15 लाख जीवन बचाए जा सकते हैं.

हॉस्पिटल के वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ दीपक कुमार जैन ने बताया कि 1933 में अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ ने स्विट्जरलैंड में जिनेवा में पहली बार विश्व कैंसर दिवस मनाया था. यह दिवस कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने, लोगों को शिक्षित करने, इस रोग की रोकथाम करने के लिए दुनिया भर में सरकारों और व्यक्तियों को समझाने तथा हर साल लाखों लोगों को मरने से बचाने के लिए मनाया जाता है.

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी के वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉक्टर जलज बक्शी ने बताया कि खान पान में बदलाव,  बदलती जीवनशैली कैंसर का प्रमुख वजह बनता जा रहा है. 40 फीसद कैंसर सिर्फ तंबाकू के सेवन से होता है. उन्होंने कहा कि युवाओं में बढ़ती धुम्रपान की लत कैंसर को बढ़ावा दे रही है. कैंसर की रोकथाम कैसे हो और लोगो में इसके प्रति जागरुकता  बढ़े इसके लिए बहुत शीघ्रता से काम करने की जरूरत है .

हॉस्पिटल की वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉक्टर मुक्ता ने बताया कि पुरुषों में आमतौर पर कैंसर फेफड़े, मुंह, गले और आमाशय में होता है. वहीं अधिकांश महिलायें स्तन, मुंह और गर्भाशय के मुंह के कैंसर की शिकार हो रही हैं.

ये हैं कैंसर के लक्षण है – शरीर में किसी भी तरह की गांठ का अनियंत्रित बढना, तिल का बढ़ना और रंग बदलना, किसी भी घाव का लंबे समय तक ठीक न होना, भूख कम लगना, वजन कम होना, थकान और आलस्य का बने रहना और दो हफ्ते से अधिक समय तक खांसी का रहना.

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