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गाजियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन के सर्वे में 93 प्रतिशत अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने में जताई असहमति GHAZIABAD

संजय गिरि / गाज़ियाबाद voice

कोरोना काल में स्कूल खोले जाने को लेकर असहमति जताते हुए गाज़ियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन ने ट्वीटर सर्वे कराया है. एसोसिएशन के पदाधिकारियों की मानें तो सर्वे में 93% अभिभावकों ने कोरोना की वैक्सीन आने तक बच्चों को स्कूल भेजने पर असहमति जताई है. कोरोना के ख़ौफ़ से अभिभावक अपने बच्चों का जीवन खतरे में डालने के लिये तैयार नहीं हैं.

गाजियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन ने ट्वीटर पोलिंग के माध्य्म से बिना वैक्सीन आये बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर सर्वे कराया गया. सर्वे के मुताबिक़ 93℅ अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने पर असहमति जताई, जबकि 5℅ अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने पर सहमति जताई और 2% अभिभावकों ने ‘कह नही सकते’ के रूप में अपना जबाब दिया है.

एसोसिएशन के मुताबिक़ ट्वीटर के जरिये कराई गई पोलिंग के माध्य्म से अभिभावक अपने बच्चों का जीवन खतरे में नही डालना चाहते हैं क्योंकि ना तो कोरोना से बचाव के लिए देश मे कोई वैक्सीन उपलब्ध है और ना ही सरकार और निजी स्कूल बच्चों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है. उल्टे निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से बच्चों को स्कूल भेजने के लिए कंसेंट लेटर भेजा जा रहा है जिसका परिणाम यह हुआ कि 19 अक्टूबर को जिला प्रशासन द्वारा निजी स्कूल खोलने के निर्णय पर ना के बराबर ही बच्चे स्कूल पहुँचे.

गाज़ियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन द्वारा कहा गया कि स्कूल खोलने की हड़बड़ाहट में प्रशासन द्वारा शम्भू दयाल स्कूल में अस्थाई जेल को स्थानांतरित किये बिना ही स्कूल खोल दिया गया और बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया गया. आखिर किस आधार पर स्कूल में बनी अस्थाई जेल को स्थानांतरित किये बिना स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया? क्या जिला प्रशासन की नजर में बच्चों के जीवन का कोई मोल नहीं? सर्वे के आधार पर गाज़ियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन ने पुनः जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि बिना वैक्सीन आये स्कूल खोलने का निर्णय वापस लिया जाये और बच्चों का जीवन खतरे में ना डाला जाये.

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