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हेपेटाइटिस : जागरुकता की कमी के कारण मृत्यु दर में लगातार हो रही है वृद्धि GHAZIABAD

संजय गिरि / गाज़ियाबाद voice

वायरल हेपेटाइटिस को हमारे देश से खत्म करना एक चुनौती भरा काम है इसलिए लोगों को हेपेटाइटिस, समय पर जांच, इलाज और उपलब्ध इलाजों के बारे में शिक्षित और जागरुक करना बेहद जरूरी है. भारत में इससे पीड़ित लोगों की संख्या 10 करोड़ से भी ज्यादा है. हैरानी कि बात ये है कि जहां अधिकतर मरीजों को पता ही नहीं होता कि उन्हें हेपेटाइटिस है.

वायरल हेपेटाइटिस पूरी दुनिया में चिंता का विषय

डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन) द्वारा साझा किए गए हालिया आंकड़ों के अनुसार 29 करोड़ से भी ज्यादा लोग हेपेटाइटिस की बीमारी से ग्रस्त हैं लेकिन उन्हें इसके बारे में कोई खबर नहीं है. जागरुकता में कमी के कारण लोग जांच को महत्व नहीं देते हैं, जिसके कारण ऐसे मरीज अपनी जान गंवा बैठते हैं. विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2020 के अवसर पर ‘फाइंड द मिसिंग मिलियंस’ थीम के जरिये लोगों को बीमारी के प्रति जागरुक करने का उद्देश्य तय किया गया है.

डॉ प्रेमाशीष कर

सावधानी अपना बाख सकते हैं बीमारी से

गाज़ियाबाद के वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के गैस्ट्रोलॉजी और हेपेटोलॉजी विभाग के डायरेक्टर व हेड डॉ प्रेमाशीष कर ने गाज़ियाबाद voice से बात करते हुए इस बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि थोड़ी सावधानी बरतने से हम इस घातक बीमारी से बच सकते हैं. इसमें हेपेटाइटिस का टीका लगवाना, संक्रमित सुई या सीरिंज का इस्तेमाल न करना, संक्रमित व्यक्ति के साथ संभोग के दौरान गर्भनिरोधक का इस्तेमाल, इस्तेमाल की गई शेविंग ब्लेड या रेज़र का इस्तेमाल न करना आदि सावधानियां शामिल हैं.

पीलिया और हेपेटाइटिस एक दूसरे से अलग

वायरल हेपेटाइटिस में मरीज को बुखार, कमज़ोरी, उल्टी, भूख न लगना, वजन कम होना, अस्वस्थ महसूस करना आदि समस्याएं होती हैं. इसके बाद पीलिया की समस्या होती है जहां पीलिया होते ही बुखार उतर जाता है. हालांकि, हेपेटाइटिस एक आम बीमारी है, फिर भी अधिकतर लोग इसमें और पीलिया में कोई फर्क नहीं समझते हैं. लोगों को यह समझने की जरूरत है कि पीलिया और हेपेटाइटिस एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं. पीलिया लीवर को प्रभावित करने वाली बीमारी का संकेत देता है, जबकी हेपेटाइटिस खुद एक बीमारी है जो लीवर में सूजन की समस्या को दर्शाता है.

मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली गाज़ियाबाद

वायरल हेपेटाइटिस को ख़त्म करना बड़ी चुनौती

डॉ प्रेमाशीष कर ने बताया कि ‘वायरल हेपेटाइटिस’ को हमारे देश से खत्म करना एक चुनौती भरा काम है. लोगों को हेपेटाइटिस, समय पर जांच, इलाज और उपलब्ध इलाजों के बारे में शिक्षित और जागरुक करना बेहद जरूरी है. जब हमारे देश में एचएवी टीकाकरण उपलब्ध होगा तो इसकी मदद से गर्भावस्था की दूसरी/तीसरी तिमाही में वायरल हेपेटाइटिस से ग्रस्त होने वाली महिलाओं की मृत्यु दर को कम किया जा सकेगा. वैश्विक एचबीवी प्रसार पर पहले ही शिशु के टीकाकरण का विस्तार और प्रदर्शन किया जा चुका है.

जान जाने का खतरा होता है ज्यादा

बीमारी का निदान लिवर फंक्शन टेस्ट के जरिए किया जाता है जो हाइपर बिलिरुबिनेमिया के मिलाव और ट्रांसएमिनस में 3 से 5 गुना वृद्धि को दर्शाता है. वायरल हेपेटाइटिस के अधिकांश मरीज 4 से 6 हफ्तों में ठीक हो जाते हैं. लेकिन कुछ लोगों में यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है जिसे एक्यूट लीवर फेलियर कहते हैं और इसमें जान जाने का खतरा ज्यादा होता है.

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