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मैक्स हास्पिटल, वैशाली में किडनी डे पर चलाया गया जागरूकता अभियान GHAZIABAD

विनोद गिरि / गाज़ियाबाद voice

मैक्स हॉस्पिटल वैशाली ने किडनी डे को ध्यान रखते हुए एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया. आयोजन में 200 से ज्यादा लोगों ने भाग लिया और इस अवसर पर अस्पताल के वाइस प्रेसिडेंट (आपरेशन) डॉ. गौरव अग्रवाल द्वारा प्रिविलेज कार्ड का लॉन्च भी किया गया. लोगों को किडनी सम्बंधित बीमारियों के प्रति जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक का आयोजन भी किया गया.

इस मौके पर अस्पताल के वाइस प्रेसिडेंट (आपरेशन) डॉ गौरव अग्रवाल ने कहा कि किडनी से संबंधित रोग पूरे विश्व में स्वास्थ्य चिंता का विषय हैं, जिसका गंभीर परिणाम किडनी फेलियर और समयपूर्व मृत्यु के रूप में सामने आता है. वर्तमान में किडनी रोग महिलाओं में मृत्यु का आठवां सबसे प्रमुख कारण है. उन्होंने कहा कि कई लोगों को यह जानकर हैरानी हो सकती है कि मुट्ठी के आकार का यह अंग हमारे स्वास्थ्य और जीवन में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. दरअसल ये दो छोटे से मुट्ठी के आकार के अंग कई बार अचानक काम करना बंद कर देते हैं. किडनी रोग मुख्यतः डायबिटीज, उच्च रक्तदाब और धमनियों के कड़े होने से हो जाते हैं.

आगे उन्होंने बताया कि इन रोगों में से कई किडनियों के सूजने के कारण भी हो सकते हैं. इस स्थिति को नेफ्राइटिस कहते हैं. चूंकि किडनी रोगों के कारण अलग-अलग हो सकते हैं, उसी प्रकार से विभिन्न रोगियों में इसके लक्षणों में भिन्नता पाई जा सकती है. हालांकि, कुछ सामान्य लक्षणों में बहुत अधिक या बहुत कम यूरीन, यूरीन में रक्त आना या रसायनों की मात्रा आसामान्य हो जाना सम्मिलित हैं. लेकिन अगर यह रोग बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है, तो पहला लक्षण तेज बुखार के रूप में दिखाई देता है.

मैक्स अस्पताल, वैशाली में नुक्कड़ नाटक के जरिये भी लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया. इस मौके पर नेफ्रोलॉजि और किडनी ट्रांसप्लांट के निदेशक डॉ. मनोज के. सिंघल, डॉ  नीरू पी. अग्रवाल  और अस्पताल के वाइस प्रेसिडेंट (आपरेशन) डॉ. गौरव अग्रवाल  के साथ  नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. संजय सक्सेना भी मौजूद रहे.

बच्चों को प्रोसेस्ड फूड व फिज्जी ड्रिंक्स से दूर रखें

एक संतुलित भोजन में वसा, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का मिश्रण होना चाहिए. बच्चों को प्रोसेस्ड फूड, फिज्जी ड्रिंक्स से दूर रखें ताकि उनके शरीर में शूगर और नमक का उचित स्तर बना रहे. माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चों में मोटापा न बढ़े, वो फिट और एक्टिव रहें तथा पोषक भोजन का सेवन करें. बच्चों को फिट रखने के लिए उन्हें खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें. भरपूर पानी पिएं और धूम्रपान न करें, मेडिसीन्स एंड ड्रग्स और सोडियम का सेवन कम करें व पोटेशियम का सेवन बढ़ा दें.

किडनी प्रत्यारोपण के 80 प्रतिशत मामले सफल रहते हैं

जब किडनी फेलियर अंतिम चरण पर पहुंच जाता है तब उसे केवल डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट द्वारा ही नियंत्रित किया जा सकता है. डायलिसिस सप्ताह में एक बार किया जा सकता है या इससे अधिक बार भी, यह स्थितियों पर निर्भर करता है. प्रत्यारोपण में बीमार किडनी को स्वस्थ्य किडनी से बदल दिया जाता है. प्रत्यारोपण के 80 प्रतिशत मामले सफल रहते हैं. प्रत्यारोपण के मामलों में केवल एक ही डर रहता है कि शरीर कहीं प्रत्यारोपण को अस्वीकार तो नहीं कर देगा. हालांकि, यह जोखिम लेना जरूरी है क्योंकि स्वस्थ किडनी आपको बेहतर जीवन जीने में सहायता कर सकती है.

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